अखिल भारतीय निबन्ध प्रतियोगिता - आचार्यों के लिए

विचारों को उचित तरीके से स्पष्ट कर पाने की कला को सीखना ही निबन्ध-लेखन का मूल मंतव्य है। निबन्ध लेखन अपने मन की प्रवृत्ति के अनुसार स्वच्छंद गति से इधर-उधर फूटी हुई सूत्र शाखाओं पर विचरता चलता है। निबन्ध लेखक को अपनी बात किसी अन्य मत से प्रभावित हुए बिना स्वच्छन्द कहनी चाहिए। लेखक का स्वार्थ विषय वस्तु को प्रभावित न करे, यह अत्यन्त आवश्यक है। जरूरी नहीं कि जो भी आप लिखें वह सभी की स्वीकार्य हो, जरूरी यह है कि आप निष्पक्ष होकर लिखें क्योंकि निष्पक्षता ही किसी निबन्ध की प्रथम और अन्तिम कसौटी है।

आचार्य निबन्ध प्रतियोगिता विषय -योगश्चित्त वृत्ति निरोधः

नियम -

  • 1. प्रतिभागी आचार्य, प्रधानाचार्य के पर्यवेक्षण में दिनांक 08 सितम्बर 2018 को विद्यालय में बैठकर अपना निबन्ध उपरोक्त विषयों में से किसी एक विषय पर लिखेंगे।
  • 2. निबन्ध की शब्द सीमा 1500 - 2000 शब्द तथा समय सीमा 2 घण्टे अधिकतम रहेगी।
  • 3. विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रत्येक निबन्ध को अपने हस्ताक्षर से प्रमाणित कर सभी निबन्धों को प्रतिभागिता सूची के साथ अपने प्रान्तीय कार्यालय को प्रेषित करेंगे।
  • 4. प्रान्तीय समिति प्राप्त निबन्धों का मूल्यांकन करवाकर श्रेष्ठतम पाँच निबन्ध एवं समस्त प्रतिभागिता सूची संस्कृति शिक्षा संस्थान, कुरुक्षेत्र को 30 सितम्बर, 2018 तक प्रेषित करें।
  • 5. सभी प्रान्तों से प्राप्त निबन्धों का पुनः तुलनात्मक मूल्यांकन करवाकर श्रेष्ठतम ग्यारह निबन्ध अखिल भारतीय स्तर पर पुरस्कृत होंगे।
  • 6. पुरस्कार राशि - प्रथम 5100.00 रुपये, द्वितीय 3100.00 रुपये, तृतीय 2500.00 रुपये, चतुर्थ 2100.00 रुपये, पंचम 1500.00 रुपये तथा शेष छः प्रोत्साहन पुरस्कार प्रत्येक 1100.00 रुपये होगा।
  • 7. सभी पुरस्कृत निबन्ध संस्कृति शिक्षा संस्थान की सम्पत्ति होंगे तथा उनका संस्थान द्वारा प्रकाशन हेतु प्रयोग किया जा सकेगा।

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